राकेश दीवान

वरिष्ठ पत्रकार और नर्मदा बचाओ आंदोलन के संस्थापक सदस्य
भोपाल, मध्य प्रदेश

नर्मदा नदी से अपने संबंध पर राकेश दीवान के विचार

भारत में अनेक नदियों की पूजा विभिन्न समुदायों द्वारा की जाती है, विशेष रूप से हिंदुओं द्वारा। देश के कई बड़े धार्मिक आयोजन नदियों के किनारे ही होते हैं। इसी तरह नर्मदा नदी के किनारे रहने वाले लोगों का इस नदी से गहरा संबंध है। कुछ समुदाय नर्मदा को देवी के रूप में पूजते हैं, जबकि अन्य उसे माँ और जीवनदायिनी के रूप में मानते हैं।

हिंदू मान्यता के अनुसार गंगा नदी में स्नान करने से व्यक्ति के पाप धुल जाते हैं, जबकि नर्मदा के बारे में यह विश्वास है कि केवल उसके दर्शन मात्र से ही पापों से मुक्ति मिल जाती है।

नर्मदा से जुड़े अनेक अनुष्ठान, प्रार्थनाएँ, स्तोत्र और धार्मिक ग्रंथ हैं। माना जाता है कि नर्मदा के तट पर पाया जाने वाला हर पत्थर शिवलिंग के समान है, इसलिए नदी के दोनों किनारों पर अनेक शिव मंदिर स्थित हैं, जिनमें से कई ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

नर्मदा पुराण के अनुसार जो व्यक्ति प्रतिदिन प्रातः नर्मदा के पंद्रह पवित्र नाम—रेवा, मंदाकिनी, सुरसा, शून, महती, महार्णव, विपापा, विपाशा, विमला, करभा, कृपा, दक्षिण गंगा, त्रिकुटी और परा—का स्मरण करता है, वह पुण्य प्राप्त करता है। इन नामों का श्रवण भी शुभ माना जाता है।

नर्मदा के महत्व को ध्यान में रखते हुए हर वर्ष नर्मदा जयंती बड़े उत्साह के साथ नदी के किनारे-किनारे मनाई जाती है। इस अवसर पर नर्मदा को जीवनदायिनी के रूप में सम्मान दिया जाता है। “नमामि देवी नर्मदे” का उद्घोष श्रद्धालुओं के बीच अक्सर सुनाई देता है।

नर्मदा से जुड़ी एक अनोखी परंपरा नर्मदा परिक्रमा है, जिसमें हजारों लोग पूरी नदी की पैदल परिक्रमा करते हैं। लगभग 2600 किलोमीटर की इस यात्रा में यात्री बहुत कम सामान के साथ चलते हैं। नदी किनारे रहने वाले लोग इन यात्रियों की सेवा करना पुण्य का कार्य मानते हैं।

इसी पृष्ठभूमि में प्रस्तुत यह छोटा सा वीडियो अंश राकेश दीवान के विस्तृत साक्षात्कार से लिया गया है। होशंगाबाद में नर्मदा के किनारे पले-बढ़े राकेश दीवान अपने बचपन की स्मृतियों और अपनी दादी तथा पिता के नर्मदा से जुड़े संबंधों को याद करते हैं।

उनके अनुभवों के माध्यम से हम यह भी समझ सकते हैं कि नर्मदा पर बनने वाले बड़े बाँधों का विरोध क्यों हुआ और इन परियोजनाओं ने नदी किनारे रहने वाले लाखों लोगों के जीवन पर किस प्रकार गहरा प्रभाव डाला।

राकेश दीवान अपने घर और कार्यालय में, भोपाल, मध्य प्रदेश में।फोटो क्रेडिट: नंदिनी ओझा

साक्षात्कार अवधि:
0:08:32

भाषा:
हिंदी (अंग्रेज़ी उपशीर्षक उपलब्ध)

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